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वीडियो गेम लूट बॉक्स नया नियम अब 16 साल रेटिंग जरूरी
Technology Mar 14, 2026 1 min read

वीडियो गेम लूट बॉक्स नया नियम अब 16 साल रेटिंग जरूरी

Editorial Staff

National Hindi News

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संक्षेप

यूरोप में वीडियो गेम की रेटिंग तय करने वाली संस्था 'पैन-यूरोपियन गेम इंफॉर्मेशन' (PEGI) ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब जिन गेम्स में 'लूट बॉक्स' (loot boxes) जैसे फीचर्स होंगे, उन्हें कम से कम 16 साल की उम्र की रेटिंग दी जाएगी। यह नया नियम इसी साल जून महीने से लागू होने जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गेमिंग के दौरान जुए जैसी आदतों और अनिश्चित खर्चों से बचाना है।

मुख्य प्रभाव

इस फैसले का सबसे गहरा असर उन वीडियो गेम्स पर पड़ेगा जो बच्चों और किशोरों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। अब तक कई ऐसे गेम्स, जिन्हें छोटे बच्चे भी खेल सकते थे, उनमें पैसे देकर रैंडम इनाम जीतने का विकल्प होता था। नए नियमों के बाद, ऐसे सभी गेम्स को अब '16+' की श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसका मतलब है कि गेम बनाने वाली कंपनियों को या तो अपने गेम से ये फीचर्स हटाने होंगे या फिर वे छोटे बच्चों को अपना टारगेट नहीं बना पाएंगी। इससे गेमिंग इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

मुख्य विवरण

क्या हुआ

PEGI ने घोषणा की है कि वह अपने रेटिंग सिस्टम को और सख्त बना रहा है। अब तक जिन गेम्स में लूट बॉक्स होते थे, उन पर केवल एक छोटा सा चेतावनी वाला लेबल लगा होता था। लेकिन अब, अगर किसी गेम में असली पैसे खर्च करके कोई ऐसा डिजिटल सामान खरीदा जाता है जिसका परिणाम पहले से पता न हो, तो उसे अनिवार्य रूप से 16 साल या उससे अधिक उम्र की रेटिंग दी जाएगी। यह नियम उन सभी गेम्स पर लागू होगा जो यूरोप के बाजारों में बेचे जाते हैं।

महत्वपूर्ण आंकड़े और तथ्य

यह बदलाव जून से प्रभावी होगा। गेमिंग विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर में गेमिंग से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन लूट बॉक्स से आता है। कई मशहूर गेम्स जैसे 'फीफा' और 'ओवरवॉच' में इस तरह के फीचर्स का इस्तेमाल होता रहा है। अब इन गेम्स को अपनी रेटिंग बचाने के लिए या तो इन फीचर्स को बदलना होगा या फिर वे 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं रहेंगे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

लूट बॉक्स असल में गेम के अंदर मिलने वाले ऐसे डिजिटल डिब्बे या पैकेट होते हैं, जिन्हें खिलाड़ी असली पैसे देकर खरीदते हैं। इन डिब्बों के अंदर क्या निकलेगा, यह पहले से तय नहीं होता। कभी इसमें गेम का कोई बहुत शक्तिशाली हथियार निकल आता है, तो कभी कोई साधारण सी चीज। यह पूरी प्रक्रिया एक तरह की लॉटरी या जुए की तरह काम करती है। पिछले कुछ सालों में कई देशों की सरकारों और बाल सुरक्षा संगठनों ने इस पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इससे बच्चों में कम उम्र में ही जुए की लत लग सकती है और वे अपने माता-पिता के पैसे अनजाने में खर्च कर सकते हैं।

जनता या उद्योग की प्रतिक्रिया

अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उनका मानना है कि गेमिंग कंपनियां बच्चों के मनोविज्ञान का फायदा उठाकर उनसे पैसे खर्च करवाती थीं, जिस पर अब लगाम लगेगी। वहीं, गेमिंग इंडस्ट्री के कुछ जानकारों का कहना है कि इस नियम से कंपनियों की कमाई कम हो सकती है। हालांकि, कई बड़ी कंपनियों ने पहले ही अपने गेम्स में बदलाव करना शुरू कर दिया है ताकि वे विवादों से बच सकें और सुरक्षित गेमिंग का माहौल बना सकें।

आगे क्या असर होगा

आने वाले समय में हम देख सकते हैं कि गेम बनाने वाली कंपनियां लूट बॉक्स के बजाय सीधे सामान बेचने का तरीका अपनाएंगी, जहां खिलाड़ी को पता होगा कि वह क्या खरीद रहा है। इसके अलावा, अन्य देशों की रेटिंग एजेंसियां भी यूरोप के इस कदम को देखकर अपने नियमों में बदलाव कर सकती हैं। इससे गेमिंग की दुनिया अधिक पारदर्शी बनेगी। माता-पिता के लिए भी अब यह पहचानना आसान होगा कि कौन सा गेम उनके बच्चे के मानसिक विकास और सुरक्षा के लिहाज से सही है।

अंतिम विचार

तकनीक के इस दौर में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। PEGI का यह फैसला न केवल बच्चों को वित्तीय जोखिमों से बचाएगा, बल्कि गेमिंग कंपनियों को भी अधिक जिम्मेदार बनाएगा। गेमिंग मनोरंजन का साधन होना चाहिए, न कि किसी बुरी लत का जरिया। यह बदलाव एक सुरक्षित और बेहतर गेमिंग संस्कृति की शुरुआत है, जो भविष्य में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लूट बॉक्स क्या होते हैं?

लूट बॉक्स गेम के अंदर मिलने वाले ऐसे वर्चुअल डिब्बे हैं जिन्हें पैसे देकर खरीदा जाता है, लेकिन उनके अंदर मिलने वाला इनाम पूरी तरह से किस्मत पर निर्भर करता है।

नया नियम कब से लागू होगा?

यूरोप में यह नया नियम जून महीने से लागू होने जा रहा है, जिसके बाद लूट बॉक्स वाले गेम्स को 16+ रेटिंग दी जाएगी।

क्या यह नियम भारत में भी लागू होगा?

फिलहाल यह नियम यूरोप की रेटिंग संस्था PEGI ने बनाया है, इसलिए यह यूरोप के लिए है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इसके प्रभाव से भारतीय गेमिंग बाजार में भी बदलाव देखे जा सकते हैं।

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